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Shikridhar-Chamba

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शिकरीधार का इतिहास, रहस्य और पर्यटन गाइड

आस्था, चमत्कार और हिमालयी सौंदर्य की पावन भूमि

Himachal Pradesh की देवभूमि में स्थित Chamba जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन मंदिरों और लोककथाओं के लिए प्रसिद्ध है। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है शिकरीधार, जो आस्था, रहस्य, अध्यात्म और रोमांच का अद्भुत संगम माना जाता है।

यह स्थान केवल एक पर्वतीय शिखर नहीं, बल्कि स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए दिव्य ऊर्जा का केंद्र है। मान्यता है कि यहाँ स्वयं Shiva (भोले बाबा) का निवास रहा है, और उनके पवित्र परिवार — Parvati और Ganga — की दिव्य उपस्थिति आज भी यहाँ अनुभव की जा सकती है।

शिकरीधार की पौराणिक कथा

लोकमान्यताओं के अनुसार एक समय भगवान शिव हिमालय की गोद में तपस्या हेतु स्थान की खोज कर रहे थे। उन्हें चंबा क्षेत्र का यह शांत, प्राकृतिक और ऊर्जावान स्थल अत्यंत प्रिय लगा। उन्होंने यहाँ ध्यान साधना आरंभ की और यह क्षेत्र दिव्यता से आलोकित हो गया।

कहा जाता है कि जब भगवान शिव Manimahesh Lake की यात्रा पर निकले, तब उन्होंने खज्जी नाग को अपने परिवार की देखरेख का दायित्व सौंपा। उसी समय एक राक्षस ने इस क्षेत्र पर आक्रमण कर दिया।

भयंकर युद्ध हुआ। देवदार के विशाल वृक्ष उखड़ गए, उनकी जड़ें ऊपर और शाखाएँ नीचे की ओर फैल गईं। आज भी शिकरीधार, जुंहार और Khajjiar के आसपास कुछ विचित्र आकार के वृक्ष देखे जाते हैं, जिन्हें लोग उसी युद्ध की निशानी मानते हैं।

जब माता पार्वती और माता गंगा को इस घटना का पता चला, तो उन्होंने राक्षस का संहार कर इस भूमि को पुनः पवित्र बनाया। तभी से यह स्थान देवभूमि के रूप में प्रतिष्ठित हो गया।

शिकरीधार के प्रमुख मंदिर और पवित्र स्थल

1️⃣ नाग देवता मंदिर

शिकरीधार के एक छोर पर स्थित नाग देवता का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहाँ स्थानीय लोग वर्षा, समृद्धि और सुरक्षा की कामना से पूजा करते हैं।

2️⃣ माता पार्वती मंदिर

दूसरे छोर पर माता पार्वती का भव्य मंदिर स्थित है। सावन और नवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा-अर्चना होती है।

3️⃣ माता गंगा का पवित्र स्थान

मंदिरों के मध्य स्थित जलधारा को गंगा माता का प्रतीक माना जाता है। स्थानीय मान्यता है कि सावन माह में यहाँ दूध जैसी धारा प्रवाहित होती थी। वर्ष 2014 में भी ऐसी घटनाओं की चर्चा रही।

रहस्यमयी स्थान – “क्रोपड़ पुरी”

शिकरीधार का एक भाग “क्रोपड़ पुरी” के नाम से जाना जाता है। यह चारों ओर विशाल चट्टानों से घिरा हुआ है।

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि यहाँ विशेष दिनों (वीरवार और रविवार) को ढोल-नगाड़ों और बांसुरी की ध्वनि सुनाई देती थी। एक विशाल पत्थर पर मानव और गाय के पैरों के निशान होने की बात कही जाती है, जिसे लोग दिव्य संकेत मानते हैं।

🌧 वर्षा और चमत्कार की कथा

प्राचीन समय में जब वर्षा नहीं होती थी, तो Jwala Ji Temple से चेला यहाँ आकर विशेष पूजा करता था। कहा जाता है कि उसके लौटते ही वर्षा आरंभ हो जाती थी।

एक अन्य कथा के अनुसार, एक बार चेले ने माता से अपने घर के निर्माण के लिए सहायता माँगी। अगले दिन वहाँ 20–30 फुट लंबे दो विशाल लकड़ी के लट्ठे पाए गए। इसे आज भी माता की कृपा माना जाता है।

🏔 बाबा दुर्गट महादेव का पवित्र स्थान

माता पार्वती मंदिर से लगभग 100 मीटर नीचे चट्टानों पर दूध जैसी धाराएँ गिरने की मान्यता है। इन्हीं चट्टानों को काटकर सामने पहाड़ी पर एक रात में भोले बाबा का मंदिर निर्मित हुआ — जिसे आज बाबा दुर्गट महादेव के नाम से जाना जाता है।

यह स्थान ध्यान और साधना के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

2014 की ग्लेशियर घटना

वर्ष 2014 में भारी हिमपात के बाद एक विशाल ग्लेशियर नीचे की ओर बढ़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार जब यह दो शक्तियों के संगम स्थल पर पहुँचा, तो अचानक दिशा बदलकर दूसरी ओर मुड़ गया।

इस घटना को लोगों ने भोले बाबा की कृपा माना, क्योंकि इससे किसी प्रकार की हानि नहीं हुई।

शिकरीधार की मूर्तिकला और सांस्कृतिक विरासत

शिकरीधार के पवित्र पत्थरों से स्थानीय मूर्तिकार वर्षों से देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ बनाते आ रहे हैं।

चंबा क्षेत्र पहले से ही अपनी पारंपरिक कला — जैसे चंबा रूमाल, मंदिर स्थापत्य और लकड़ी की नक्काशी — के लिए प्रसिद्ध है। शिकरीधार इस सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है।

पर्यटन और रोमांच गतिविधियाँ

आज शिकरीधार केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन भी है।

देवदार के घने जंगल, हिमालय की बर्फीली चोटियाँ और शांत वातावरण इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान बनाते हैं।

आसपास घूमने योग्य स्थान

यदि आप शिकरीधार की यात्रा पर हैं, तो इन स्थानों की भी सैर करें:

  • Khajjiar – जिसे “मिनी स्विट्जरलैंड” कहा जाता है

  • Manimahesh Lake – पवित्र तीर्थ स्थल

  • Dalhousie – प्रसिद्ध हिल स्टेशन

  • Kalatop Wildlife Sanctuary – वन्यजीव प्रेमियों के लिए

📅 यात्रा का सर्वोत्तम समय

  • मार्च से जून – सुहावना मौसम

  • जुलाई–अगस्त – सावन और धार्मिक आयोजन

  • सितंबर–अक्टूबर – साफ आसमान और ट्रेकिंग

  • दिसंबर–जनवरी – बर्फबारी का आनंद

🚗 कैसे पहुँचे शिकरीधार?

Himachal Pradesh के Chamba क्षेत्र में स्थित शिकरीधार सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। नीचे आपका दिया हुआ रूट सही और व्यवस्थित रूप में जोड़ा गया है:

🚗 सड़क मार्ग (By Road Route)

रूट विवरण:

1️⃣ Chamba से Tissa (State Highway)
चंबा से तिस्सा  राज्य राजमार्ग (SH) के माध्यम से यात्रा करें।

2️⃣ Tissa से Gunnu Nala – लगभग 30 किमी
चंबा से गुनु नाला तक लगभग 30 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से तय करें।

3️⃣ Gunnu Nala से Kainthly – लगभग 4 किमी
गुनु नाला से कैन्थली तक लगभग 4 किलोमीटर का मार्ग है।

4️⃣ Kainthly से Behlam (Kohaal Road)
कैन्थली से डिड्डोड़ी (Diddodi) होते हुए कोहाल रोड के माध्यम से डौभी (Doubhi) तक जाएँ। इसके बाद स्थानीय मार्ग से शिकरीधार की ओर पहुँचा जा सकता है। अंतिम हिस्सा कच्चा या संकरा पहाड़ी मार्ग हो सकता है, 


🚌 अन्य यात्रा विकल्प

  • ✈ निकटतम हवाई अड्डा: कांगड़ा (गग्गल)

  • 🚆 निकटतम रेलवे स्टेशन: पठानकोट

  • 🚌 चंबा से स्थानीय टैक्सी/बस उपलब्ध


⚠ यात्रा सुझाव

✔ बरसात और बर्फबारी के मौसम में सड़क की स्थिति की जानकारी पहले लें।
✔ पहाड़ी मार्ग होने के कारण दिन के समय यात्रा करना सुरक्षित रहता है।
✔ स्थानीय लोगों से अंतिम मार्ग की पुष्टि कर लें।

आध्यात्मिक अनुभव

शिकरीधार की यात्रा केवल पर्यटन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति का अनुभव है। यहाँ पहुँचकर व्यक्ति प्रकृति और अध्यात्म के गहरे संबंध को महसूस करता है।

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